Sunday, March 25, 2018

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क्या आपको पता है?

*आज 25 मार्च का इतिहास – आज के दिन भारत एवं विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएँ*

भारत और विश्व इतिहास में 25 मार्च का अपना ही एक खास महत्व है, क्योकि इस दिन कई ऐसी घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं। आईये जानते हैं 25 मार्च की ऐसी ही कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

*25 मार्च की ऐतिहासिक घटनाओं की सूची:*

1306 रॉबर्ट ब्रूस को स्कॉटलैंड का नया राजा बनाया गया।

1668 अमेरिका में पहली बार घुड़दौड़ का आयोजन हुआ।

1669 सिसदी द्वीप पर मौजूद ज्वालामुखी माउंट एटना में भयंकर विस्फोट, 20 हजार से अधिक लोगो की मौत हुई।

1700 लंदन ने फ्रांस, इंग्लैंड और हॉलैंड की संधि पर हस्ताक्षर किए।

1751 स्वीडन के फ्रेडरिक प्रथम को एडॉल्फ फ्रेडरिक द्वारा राजा के रूप में सफल किया गया।

1753 वोल्टेयर ने पर्शिया की फ्रेडरिक द्वितीय को अदालत ने छोड़ा।

1754 पहली बार के लिए एक वैधानिक आधार पर उस अधिकार क्षेत्र में शादी को लेकर 1753 के गुप्त विवाह अधिनियम इंग्लैंड और वेल्स में लागू किया गया।

1807 इंग्लैड में पहली यात्री रेल सेवा शुरू हुई।

1811 महान धूमकेतु ऑनर्रे फ्लॉगारज द्वारा खोजा गया।

1896 यूनान की राजधानी एथेंस में आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरूआत।

1905 प्रसिद्ध भारतीय राजनेता मिर्जा राशिद अली बेग का जन्म हुआ।

1954 देश के पहले हेलीकाप्टर एस-55 को दिल्ली में उतारा गया।

1988 नासा ने अंतरिक्ष यान एस 206 का प्रक्षेपण किया।

1989 अमेरिका में निर्मित देश का पहला सुपर कम्प्यूटर एक्स- एमपी 14 राष्ट्र को समर्पित किया गया।

1995 विख्यात मुक्केबाज माइक टायसन तीन साल की कैद के बाद जेल से रिहा हुए।

1999 भारत द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों के आठ वर्गों को वीजा मामले में छूट देने की घोषणा।

2001 अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 100 मील दूर आए जबरदस्त भूकंप की चपेट में आकर एक हजार से अधिक लोगों की मौत।

2003 पहला पोर्टेबल कम्प्यूटर बनाने वाले एडम ओस्बोर्न का निधन।

2011 सिक्का निर्माण विधेयक 2011 में नोट फाडने या सिक्के को गलाने पर सात साल की कैद का प्रावधान किया गया।

*25 मार्च को जन्में प्रसिद्ध लोगों की सूची:*

1948 फारूक शेख (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2010)

*25 मार्च को प्रसिद्ध लोगों के निधन की सूची:*

2014 नंदा (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार (1961)

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Sunday, January 28, 2018

पनीर हरियाली टिक्का रेसिपी

• पनीर हरियाली टिक्का रेसिपी :-

धनिये, पुदीने के स्वाद के साथ पनीर की ये डिश आपकी हर छोटी-बड़ी पार्टी का मजा दोगुना कर देगी. इसे आप ओवन या फिर ग्रिल पैन में बना सकते हैं. जानें रेसिपी...

• आवश्यक सामग्री :-

250 ग्राम पनीर
3 बड़ा चम्मच
50 ग्राम धनियापत्ती
2-3 हरी मिर्च
2 बड़ा चम्मच तेल
2 बड़ा अदरक लहसुन पेस्ट
2 बड़ा चम्मच योगर्ट
1 बड़ा चम्मच बेसन
1 छोटा चम्मच चाट मसाला
1 छोटा चम्मच गरम मसाला
1 छोटा चम्मच नींबू का रस
स्वादानुसार नमक

• विधि :-

- सबसे पहले धनियापत्ती, पुदीना पत्ती और हरी मिर्च को धोकर काट लें.

- इन्हें मिक्सर जार में नींबू के रस के साथ पीसकर पेस्ट बना लें.

- इस पेस्ट को एक बड़े बर्तन या बाउल में निकालें और इसमें योगर्ट, अदरक लहसुन का पेस्ट, बेसन, चाट मसाला, गरम मसाला और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें.

- फिर इसमें तेल डालकर अच्छी तरह फेंट लें.

- पनीर को क्यूब्स में काटकर इस पेस्ट में अच्छी तरह मिक्स कर लें. ताकि मसाला अच्छी तरह पनीर में लपट जाए. इसे 2 घंटे के लिए छोड़ दें.

- तय समय के बाद ओवन को 200 डिग्री सेल्सियस पर प्रीहीट कर लें.

- स्क्वेयर में पनीर क्यूब्स को लगाएं और 15 मिनट तक ग्रिल करें. (आप चाहें तो इन्हें ग्रिल पैन में भी पका सकते हैं.)

- पुदीने की चटनी और प्याज के साथ गर्मागर्म हरियाली पनीर टिक्का सर्व करें और खुद भी मजे से खाएं.

Friday, January 26, 2018

26 जानेवारी

*२६ जानेवारी म्हणजे काय ?*
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२६ जानेवारी पासून भारतात संविधान लागू करण्यात आले. भारतात डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी २ वर्षे ११ महिने १७ दिवस सतत सखोल अभ्यास करून भारतीय संविधानाची लिहले. संविधान लिहितांना डॉ . बाबासाहेबांनी आपल्या स्वतःच्या तब्येतीची सुद्धा काळजी केली नाही.
डॉ.बाबासाहेबांनी जगातील सर्व प्रगत राष्ट्रांच्या घटनांचा अभ्यास करून भारताची राज्यघटना बनविली . त्या घटनेप्रमाणे २६ जानेवारी १९५० ला भारत प्रजासत्ताक राष्ट्र बनले. स्वातंत्र्य ,समता व बंधुता या त्रयींवर आधारलेले लोकशाही राज्य म्हणून भारत हे राष्ट्र जगाच्या पाठीवर उभे राहिले .

सर्व देशातील लोकांचा समान दर्जा असला पाहिजे आणि स्वतः ची सर्वांगीण प्रगती घडवून आणण्यासाठी त्यांना समान संधी मिळाली पाहिजे , यासाठी बाबासाहेबांनी कलमे तयार केली . अस्पृश्यता पाळणे हा गुन्हा व्हावा ,म्हणून घटनेत एक कलम घालणे त्यांनी सभासदांना पटवून दिले. मागासलेल्या वर्गांना , विशेषतः अस्पृश्य व वन्य जाती यांना व स्रियांना घटनात्मक हक्क मिळणे हे जरूरी आहे आणि त्याबद्दलची देखील कलमे त्यांनी लिहून काढली .हजारो वर्षे दलित जातींचे शेकडो जीवनमरणांचे प्रश्न जे होते त्यांना देशाच्या राज्यघटनेत स्थान मिळवून देण्याचे अजरामर कार्य बाबासाहेबांनी केले.

भारताची राज्यघटना इतर देशातील राज्यघटनेपेक्षा आकाराने मोठी असूनही फार कमी काळात ती तयार करण्यात आली आहे.
१) अमेरिकेच्या घटनेला( ४ ) महिने लागले .
२) कॅनडा च्या घटनेला( २ ) वर्षे ५ महिने लागले .
३ ) ओस्ट्रेलियेच्याघटनेला (९ )वर्षे लागले .
४ ) दक्षिण आफ्रिकेच्या घटनेला (१ )वर्ष लागले.

भारताची राज्यघटना २ वर्षे ११ महिने १७ दिवसात लिहिल्या गेली .तिच्यामध्ये ३९५ कलमे ,७ परिशिष्टे आहेत त्याचप्रमाणे घटनेच्या कामकाजासाठी ११ सत्रे झाली. १४१ बैठका झाल्या . ७६३५ दुरुस्त्या सुचविल्या . त्यापैकी २४७६ मंजूर केल्या गेल्या . ११४ दिवस घटनेवर चर्चा चालली . १६५ दिवस कामकाज चालले . त्यासाठी ६३ लाख ९६ हजार ७२९ रुपये इतका खर्च झाला. घटनेचे प्रथम प्रकाशन १९५२ साली झाले. तिच्या १००० प्रती छापण्यात आल्या होत्या . मुळ प्रती इंग्रजीत आहेत इतर १४ भाषेत त्यांचे भाषांतर केले आहे .त्यावर ४४२ सदस्यांच्या सह्या असून ३१ व्या क्रमांकावर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांची भीमराव आंबेडकर अशी मराठी सही आहे.

२६ जानेवारी १९५० पासून भारत देश प्रजासत्ताक झाला. म्हणजे डॉ बाबासाहेब आंबेडकर यांनी भारतातील प्रत्येक नागरिकाला एका मताचा अधिकार दिला. आणि मताच्या आधारेच " प्रजेची सत्ता निर्माण केली." स्वतंत्र पूर्वी भारतात "राजा" हा राणीच्या पोटातून जन्म घेत असे. परंतु प्रजासत्ताक दिनापासून गणराज्य हे मताच्या पेटीतून जन्म घेते...
एवढे मोठे परिवर्तन भारतरत्न, विश्वविभूषण , भारतीय संविधानाचे शिल्पकार, समस्त भारताचे उद्धारक थोर महामानव डॉ . बाबासाहेब आंबेडकरांनी घडवून आणले .

२६ जानेवारी संविधान दिन चिरायू होवो.
.......

Wednesday, January 24, 2018

रेसिपी

रेसिपी नाम ➖
आलू और मूंग दाल के कटलेट
सामग्री ➖
3कटोरी मूंग की दाल
1कटोरी पोहा
2चम्मच अदरक हरी मिर्च का पेस्ट
2बड़े आलू
1/2 कटोरी हरा धनिया कटा हुआ
1/2चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1/2 चम्मच हल्दी पावडर
1/2 चम्मच चाट मसाला
1/2 चम्मच जीरा
1/2 चम्मच सौंफ
नमक स्वादानुसार
नोट ➖ 1कटोरी गली हुयी मूंग दाल लपेटने के लिए रखे।
अपने स्वादानुसार चटपटा बना सकते है।
विधि ➖
मूंग की दाल धोकर 8_10 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख लें
मिक्सी में बारिक पीसकर रखे
पोहा धोकर नर्म होने के लिए रख दें
पिसी मूंग की दाल में नर्म पोहा अदरक हरी मिर्च का पेस्ट लाल मिर्च पाउडर हल्दी जीरा सौफ हरा धनिया काट कर के डाले चाट मसाला डाले उबले आलू मैश करके डाले और अच्छी तरह से मिलाये
नमक स्वादानुसार डालकर अच्छी तरह से मिलाये और मनचाहे शेप में बनाकर रखें
गली हुयी मूंग दाल में लपेटकर रखे
पैन में कम तैल में शैलो फ्राय करें
सर्व
करे तब टमाटर केचप और हरा धनिया की चटनी के साथ सर्व करें.
😋😋😋😋😋

Monday, January 15, 2018

कौनसा देश कब आजाद हुवा

*कौन सा देश कब आज़ाद हुआ महत्वपूर्ण जानकारी*
=> भारत -> 15 अगस्त 1947
=> पाकिस्तान -> 14 अगस्त 1947
=> अमेरिका -> 4 जुलाई 1776
=> बांग्लादेश -> 16 दिसम्बर 1971
=> अफगानिस्तान -> 27 मई 1919
=> इंडोनेशिया -> 17 अगस्त 1945
=> फिनलैंड -> 6 दिसम्बर 1917
=> सोमालिया -> 1 जुलाई 1960
=> केन्या -> 12 दिसम्बर 1963
=> फिलीपिंस -> 12 जून 1898
=> सूडान -> 1 जनवरी 1956
=> वियतनाम -> 2 सितम्बर 1969
=> मैक्सिको -> 16 दिसम्बर 1810
=> बर्मा (म्यांमार) -> 4 जनवरी 1948
=> मलेशिया -> 31 अगस्त
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1. विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर : 22 मार्च को
2. भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है
उत्तर : वट (बरगद)
3. ‘एशिया की रोशनी’ किसे कहा जाता है ?
उत्तर : गौतम बुद्ध को
4. जापान की करेन्सी है
उत्तर : येन
5. अर्जुन पुरस्कार कब से प्रारंभ किया गया ?
उत्तर : 1961 से
6. `पंजाब का टैगोर’ किसे कहा जाता है ?
उत्तर : पूरन सिंह को
7. केंद्र-राज्य सम्बन्ध किस अनुसूची में है ?
उत्तर : 7वीं
8. भारत का लम्बा सुरंग कौन है ?
उत्तर : जवाहर सुरंग
9. ध्यानचंद स्टेडियम कहाँ स्थित है ?
उत्तर : लखनऊ
10. शेरशाह का मकबरा कहाँ स्थित है ?
उत्तर : सासाराम
11. हैदराबाद किस नदी के किनारे स्थित है ?
उत्तर : मुसी नदी
12. वायुयान के टायरों में गैस भरी जाती है
उत्तर : हिलियम गैस।
13. भारत के पहले मोबाइल ऑफ शोर ड्रीलिंग प्लेटफार्म का नाम क्या है ?
उत्तर : सागर सम्राट्
14. कैल्सियम कार्बाइड पर पानी गिराने से कौन-सी गैस उत्पन्न होती है ?
उत्तर : एसीटिलीन गैस
15. चीन की सबसे पुरानी सभ्यता क्या है ?
उत्तर : हान
16. ‘फुकन कमीशन’ किससे सम्बन्धित है ?
उत्तर : तहलका कांड से
17. ‘डेड हीट’ शब्द किस खेल से सम्बन्धित है ?
उत्तर : घुड़दौड़ से
18. एयर इंडिया की प्रथम महिला पायलट कौन थी ?
उत्तर : हरप्रीत अहलूवालिया
19. ‘मैसूर एक्सप्रेस’ क्रिकेट के किस खिलाड़ी को कहा जाता है ?
उत्तर : श्रीनाथ को
20. बैंक नोट जारी करने वाला प्रथम देश कौन है ?
उत्तर : स्वीडन
21. उपनिषद् का फारसी में अनुवाद किस मुगल सम्राट के शासनकाल में हुआ था ?
उत्तर : शाहजहाँ के
22. गुर्जर-प्रतिहार वंश की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर : नागभट्ट ने
23. ‘चमत्कारी सचिन’ पुस्तक के लेखक कौन हैं ?
उत्तर : लोकेश थानी
24. विश्व विलियर्ड्स जीतने वाला प्रथम भारतीय कौन हैं ?
उत्तर : विल्सन जॅान्स
25. क्रिकेट का प्रथम विश्वकप कब हुआ था ?
उत्तर : 1975 में
26. सात टापुओं का शहर किसे कहा जाता है ?
उत्तर : मुंबई को
27. आधुनिक युग की मीरा किसे कहा जाता है ?
उत्तर : महादेवी वर्मा
28. सीमेंट, बालु एवं जल का मिश्रण क्या कहलाता है ?
उत्तर : मोर्टर
29. श्रीलंका के घास के मैदान को क्या कहा जाता है ?
उत्तर : पटाना
30. ‘बेलिंगटन ट्रॅाफी’ किस खेल से सम्बन्धित है ?
उत्तर : नौकादौड़ से
31. नॅान-स्टिक रसोई के बर्तन पर परत चढ़ाई जाती है ?
उत्तर : टेफलॅान की
32. मरकत बनता है ?
उत्तर : बेरिलियम से
33. न्यूजीलैंड में उच्च पर्वतों से उतरने वाली गर्म एवं शुष्क हवा को क्या कहा जाता है ?
उत्तर : नारवेस्टर
34. अकबर के दरबार में आने वाला पहला अंग्रेज कौन था ?
उत्तर : राल्फफिच
35. पुस्तक ‘मदर इंडिया’ के लेखक कौन है ?
उत्तर : कैपरीन मेयो
36. देश में इंटेलीजेंस ब्यूरो की स्थापना कब की गई थी ?
उत्तर : 1920 में
37. `बंकर’ शब्द किस खेल से सम्बन्धित है ?
उत्तर : पोलो से
38. बाटरलू किस देश में स्थित है ?
उत्तर : बेल्जियम में
39. उत्तरी ध्रुव तथ दक्षिणी ध्रुव की यात्रा करने वाला प्रथम भारतीय कौन हैं ?
उत्तर : अजीत बजाज
40. ‘पटाका’ किस देश की मुद्रा है ?
उत्तर : मकाऊ देश की
41. NAM (गुट निरपेक्ष आंदोलन) का पहला सम्मेलन 1961 में कहाँ स्थित था ?
उत्तर : बेलग्रेड में
42. किस दिन को अक्षय ऊर्जा दिवस के रूप में भारत में मनाया जाता है ?
उत्तर : 20 अगस्त को
43. अन्तराष्ट्रीय कंपनी ‘डी वियर्स’ किसके व्यापार से सम्बन्धित है ?
उत्तर : हीरों के व्यापार से
44. केन्द्रीय कॅाफी अनुसंधान संस्थान कहाँ अवस्थित है ?
उत्तर : बालेहोन्नूर (कर्नाटक)
45. वर्ष 1976 में आपात की उद्घोषणा के समय भारत के राष्ट्रपति कौन थे ?
उत्तर : फखरुद्दीन अली अहमद
46. क्लेयोपेट्रा किस देश की महारानी थी ?
उत्तर : मिस्र की
47. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जिन्हें भारत के राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त है
उत्तर : एम. हिदायतुल्ला
48. रूस का राष्ट्रीय खेल कौनसा है ?
उत्तर : शतरंज
49. वेरा मेंचिक कप किस खेल से सम्बन्धित है ?
उत्तर : शतरंज
50. परिमार्जन नेगी किस खेल से सम्बन्धित हैं ?
उत्तर : शतरंज से
51. परमवीर चक्र से सम्मानित प्रथम व्यक्ति कौन हैं ?
उत्तर : मेजर सोमनाथ शर्मा
52. संसद द्वारा अपदस्थ किए जाने वाले प्रधानमंत्री थे ?
उत्तर : वी. पी. सिंह
53. पहली माक्सवादी क्रांति किस देश में हुई ?
उत्तर : रूस में
54. ‘नेफा’ किस राज्य का पुराना नाम है ?
उत्तर : अरुणाचल प्रदेश का
55. अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस किस दिन मनाया जाता है ?
उत्तर : 2 अक्टूबर को
56. किस प्रदेश की सरकार द्वारा ‘अपनी धरती अपने लोग’ योजना संचालित की जा रही है ?
उत्तर: राजस्थान

Friday, December 29, 2017

उपाशी न राहता वजन कमी करा



उपाशी न राहता वजन कमी करा.

काही वैज्ञानिक तथ्ये व व्यावहारिक क्लुप्त्या

१. जेवण करण्याचा कालावधी वाढवा. म्हणजेच तुम्ही १० मिनिटात जर जेवण संपवून ताटावरुन उठत असाल तर त्याऐवजी २० मिनिटे ताटावर बसा. म्हणजेच हळूहळू जेवा. जास्त वेळा चावून खा. ३२ वेळा चावण्याचा नियम पाळा. त्याने एकतर तोंडातील लाळ अन्नामध्ये जास्त प्रमाणात मिसळेल. लाळेमध्ये टायलिन नावाचे एंझाईम असते जे कर्बोदकांच्या पचनासाठी जरुरी असते. त्याशिवाय चांगल्या प्रकारे चावून-चावून खाले तर, आपल्या मेंदूमध्ये असणारे तृप्तीचे केंद्र लवकर समाधानी पावते व कमी जेवूनही पोट भरल्याचे समाधान होते. जेवण आपोआपच कमी होते व वजन कमी व्हायला मदत होते.

२. चव समजणार्‍या ग्रंथी जीभेच्या फक्त समोरच्या भागावर असतात. त्यामुळे चवीचा आनंद घेण्यासाठी अन्नपदार्थ जीभेच्या या भागावर जास्तीत जास्त वेळ राहणे गरजेचे असते. जीभेच्या पाठीमागे व शरीरातील पुढच्या संपूर्ण अन्नमार्गामध्ये कोठेही चव समजू शकेल अशा ग्रंथी नसतात. त्यामुळे अन्नाचा घास एकदा जीभेच्या मागे गेला की चव समजणे बंद होणार; मग बेसण खाल्ले काय किंवा श्रीखंड खाल्ले काय ! त्यामुळे चवीचा खरा आनंद घेण्यासाठी, शांतपणे पुरेपूर आस्वाद घेत रंग, गंध, चव या सर्वांसह अन्नाचा आस्वाद घेणे महत्वाचे असते. म्हणून अतिशय संथपणे व ध्यानपूर्वक जेवणाकडे पूर्ण लक्ष केंद्रित करुन जेवण केल्यास सुध्दा खाण्यावर व वजनावर नियंत्रण राखणे सोपे जाते.

३. आपले पोट-जठर हे volume Sensitive (आकारमान) आहे. त्यामुळे ते भरल्या जाणे महत्वाचे. कारण ते भरल्याशिवाय आपल्याला स्वस्थता मिळत नाही. मात्र ते कशाने भरायचे याच्याशी त्याला देणेघेणे नसते. चवीशी तर नक्कीच नाही. कारण जठरामध्ये कोणत्याही प्रकारच्या चव समजणार्‍या ग्रंथी नसतात. मग पोट असल्या गोष्टींनी भरायचे की ज्यामध्ये कॅलरीज् कमी असतील, पण आकारमान जास्त असेल. उदा. सूप, ताक, सलाद, अंकुरित कडधान्य, भाज्या व फळे.

४. जेवण करतांना रोज हॉटेलमध्ये बसून जेवण घेतो आहोत असे समजून जेवायचे. म्हणून हॉटेलसारखे प्रथम फक्त वाटीभर सूप वा ताक प्यायचे. नंतर सलादची डीश संपवायची. एखादी वाटी अंकुरित कडधान्य खावून घ्यायचे. त्यानंतरच मुख्य जेवण - वरण, भात, भाजी, पोळी वाढून घ्यायचे व पोट भरुन जेवायचे. म्हणजे मग उपाशी न राहताही वजन कमी करता येईल. मग जेवतांना किती खावू असा विचार करण्याची फारशी गरज राहणार नाही.

५. वजन कमी करण्यासाठी उपाशी राहण्याची गरज नसते किंवा उपाशी राहून कमी केलेले वजन फार काळ कमी राखता येत नाही. काही दिवसांनी ते पुन्हा वाढायला लागते व खूप वेळा तर आधीपेक्षा ही जास्त वाढते. जेवण कमी न करता सुध्दा सहजतेने वजन कमी करता येते व एकदा कमी झाले की पुन्हा वाढणार नाही याची काळजी पण घेता येते. त्यासाठी काही गोष्टी फक्त कमी प्रमाणात खाण्याची गरज असते. तेल-तूप व साखर गूळ व हे ज्या खाद्यपदार्थांमध्ये जास्त प्रमाणात आहेत असे पदार्थ मुख्यत्वे मोजून खाण्याची गरज असते. इतर पदार्थ न मोजता खाल्ले तरी फारशे बिघडत नाही. रेषेदार पदार्थ मात्र भरपूर प्रमाणात खायला हवेत.

६. एक किलो वजन कमी करण्यासाठी ८००० कॅलरीज् खर्च कराव्या लागतात. त्यासाठी पायी चालणे (जवळपास २०० किमी.), सायकल चालविणे, पोहणे यासारखा व्यायाम साधारणत: ३०-४० तास करणे गरजेचे असते.

७. वजन कमी करतांना फार घाई करु नये. साधारणत: दर आठवड्याला अर्धा ते एक किलो (महिन्याला २ ते ४ किलो) वजन कमी होईल अशाप्रकारे योजना बनवावी. यापेक्षा जास्त वेगाने वजन कमी करणे, आरोग्यास अपायकारक असू शकेल. ससा व कासवाच्या शर्यतीत, कासवच जिंकतो हे लक्षात ठेवावे.

८. वजन कमी करण्यासाठी खाण्यापिण्याच्या व शरीरश्रमाच्या ज्या सवयी स्वत:ला लावून घेण्याची गरज असते त्या सर्वांसाठीच हितकर असल्याने, घरातील सर्वांनीच तसा प्रयत्न करणे फायद्याचे राहील.

९. वजन कमी करण्यासाठी खात्रीचा उपाय म्हणजे आपला बीएमआर (चयापचयाचा वेग) वाढविणे. हा मुख्य त्वे आपल्या शरीरातील स्नायूंच्या प्रमाणात असतो. त्यामुळे व्यायाम करुन स्नायू बळकट करणे हे वजन कमी करण्यासाठी महत्वाचे असते. केवळ खाण्यातील बदलांनी फार काळ वजन कमी राहू शकत नाही.

१०. शरीरात जमा झालेल्या १ किलो जास्तीच्या चरबीसाठी शरीराला जवळपास २०० कि.मी. लांबीच्या रक्तवाहिन्यांचे जाळे नव्याने तयार करावे लागते. या वाढीव रक्तवाहिन्यांच्या जाळ्यामध्ये रक्त पोहचविण्यासाठी हृदयावरील ताण ही तेवढाच वाढतो. म्हणून वजन वाढू न देणे हे हृदयाचे व पर्यायाने आपले आयुष्य वाढविण्यासाठी आवश्यक व महत्वाचे असते. आहार शास्त्राचे काही मूलभूत नियम पाळणे आरोग्यासाठी गरजेचे आहे. अ. रोजची दोन जेवणे व नाश्ता इत्यादींमध्ये खालीलपैकी प्रत्येक गटातील एक पदार्थ असणे गरजेचे आहे. १. धान्य- गहू, तांदूळ, ज्वारी, मका, बारी २. द्विदल धान्ये - डाळी वा उसळी- तूर, चना, मूग, मटकी, बरबटी, उडीद ३. पालेभाज्या व ङ्गळभाज्या व ङ्गळे ४. उर्जा देणारे पदार्थ- स्निग्ध पदार्थ - तेल, तूप, लोणी, व साखर, गूळ ५. प्राणीज पदार्थ = दूध, दही, ताक वा मांसाहारी पदार्थ - अंडी, मासे, मटन ब. शक्यतो कमीत कमी प्रक्रिया केलेले अन्न हे शरीरासाठी उपयुक्त राहील. कच्चा भाजीपाला सलादच्या स्वरुपात भरपूर खाल्ला पाहिजे. भाज्या कमीत कमी शिजवायला पाहिजेत. गाजर मूळा, काकडी, पत्तागोबी, मेथी, कांदा इत्यादि पदार्थ किसून त्यात चवीसाठी जीरा पूड, साखर, मीठ, दही घेतल्यास उत्तम, क. जेवणामध्ये जास्त उर्जेचा साठा असणारे पदार्थ हे कमीच असावेत. ड. आपली स्निग्ध पदार्थाची गरज दिवसाला २० मिली प्रति व्यक्ती, म्हणजेच महिन्याला ६०० मिली असते. आपल्याकडे खाल्ल्या जाणारे स्निग्ध पदार्थांचे प्रमाण हे गरजेपेक्षा कितीतरी जास्त (३ ते ५ पट) असते. मसालेदार तर्रीवाल्या भाज्या व तळलेले पदार्थ; शिवाय बरेचदा वरुन घेतले जाणारे तेल, तूप, तेल लावून केलेल्या पोळ्या, तूप लावलेल्या पोळ्या, सायीचे दही इत्यादी सवयी यासाठी कारणीभूत ठरतात. जास्तीच्या स्निग्ध पदार्थांचे शेवटी शरीरात चरबीमध्ये रुपांतर होते व वजन वाढते. हे झाले दिसणार्‍या स्वरुपातील स्निग्ध पदार्थांबाबत. याशिवाय अप्रत्यक्ष स्वरूपातील स्निग्ध पदार्थ म्हणजे शेंगदाणे, तीळ, नारळ वा काजू-बदाम, खव्याची मिठाई इ. हे पण रोजच्या आहारातील स्निग्ध पदार्थांचा हिशोब करतांना मोजावे लागतात. हे सर्व पदार्थ शेवटी चरबी वाढवितात. यावर खात्रीलायकरित्या नियंत्रण मिळवण्याचा उत्तम उपाय म्हणजे दरमहा घरात येणारे तेल-तूप हे जास्तीत जास्त माणशी ६०० मिली असा हिशोब करुनच आणावे व कटाक्षाने संपूर्ण महिना तेवढ्यातच सर्व भागवावे. साखर मुख्यत्वे चहा, कॉफी, बेकरीचे पदार्थ व मिठाई याद्वारे शरीरात जाते. एका कपाला २ चमचे साखर असेल तर व दिवसाकाठी ४-५ कप चहा होत असेल तर जवळपास ५०-६० ग्राम साखर शरीरात जाते. हे प्रमाण कमी करण्यासाठी एक तर चहातील साखरेचे प्रमाण कमी करावे लागेल किंवा चहा घेण्याचे प्रमाण कमी करावे लागेल. तसेच मिठाई व गोड पदार्थ आवडतात म्हणून पोटभर न खाता प्रमाणात खावे लागतील. ताजे व स्वच्छ अन्न : दिर्घायू व निरोगी जगण्यासाठी अन्नपदार्थांबाबत ही दोन तत्वे महत्वाची. ताजे म्हणजे निसर्गामध्ये तयार झालेल्या मूळ अवस्थेत अन्न पदार्थ वापरणे. निसर्गात तयार झालेल्या वस्तू फार काळ टिकत नाही. त्या टिकाव्यात म्हणून त्यावर नाना प्रकारच्या प्रक्रिया कराव्या लागतात. उदा. कैर्‍या वर्षभर खाता याव्यात म्हणून लोणचे बनवून टिकवावे लागते. तेल जास्त दिवस चांगले रहावे यासाठी रिफाईनिंग सारख्या रासायनिक प्रक्रिया कराव्या लागतात. तांदूळ जास्त दिवस टिकावेत म्हणून पॉलिशिंग करावे लागते. कारण पॉलिश केलेल्या तांदूळाला किड लवकर लागत नाही. पण त्यामुळे अन्नपदार्थांचे पोषणमूल्य कमी होते. स्वच्छ म्हणजे केवळ दिसण्याच्या बाबत नाही; तर रसायनमुक्त अन्न, निसर्गात तयार झालेल्या मूळ स्वरुपातील ताजे अन्न म्हणजे स्वच्छ. कोणतेही रसायन अन्नपदार्थ तयार करण्यासाठी न वापरणे म्हणजे स्वच्छ अन्न. आज शेतीमध्ये इतक्या जास्त प्रमाणात खते व किटकनाशकांचा वापर केला जातो की जवळपास सर्वच अन्नपदार्थांमध्ये काही प्रमाणात त्यांचे अंश शिल्लक राहतात व ते आपल्या शरीरात सुध्दा जातात. ती शरीरात गेल्यावर त्यांचे नेमके काय होते, ते शरीरात किती दिवस साठविले जातात, त्यांचे शरीरावर काय परिणाम होतात याबाबत अद्याप पावेतो तरी विज्ञानाला फारशे कळलेले नाही. पण यातील बहुतेक सर्व रसायने ही अत्यंत जहाल विषारी पदार्थ असून, त्यांचा थोडाही अंश मानवी आरोग्यासाठी घातक ठरु शकतो असे मानण्यास बराच आधार आहे. त्यामुळे रसायने न वापरता तयार झालेला भाजीपाला, फळे व इतर अन्नपदार्थ मिळविणे आरोग्यासाठी महत्वाचे. त्यासाठी मग जास्त पैसे मोजावे लागले तरी ते अंतिमत: फायद्याचेच ठरेल. त्याचप्रमाणे अन्नपदार्थ जास्त टिकले पाहिजेत यासाठी (शेलफ लाईफ वाढविण्यासाठी) त्यांच्यावर निरनिराळ्या प्रक्रिया करण्यात येतात. यातील बर्‍याचशा प्रक्रिया या रासायनिक पदार्थांचा वापर करुन केल्या जातात. या रसायनांचे अंश मानवी शरीरात जातात. हे सर्व अस्वच्छ अन्न होय. ते कमीत कमी खायला हवे. महात्मा गांधींनी एका वाक्यात आहारशास्त्राची सुंदर व्याख्या केलेली आहे. ते म्हणतात की ज्या वस्तू नासतात, सडतात, खराब होवू शकतात त्या वस्तू बहुधा आरोग्यासाठी चांगल्या असतात. ज्या वस्तू नासत नाही, सडत नाही, खराब होत नाही त्या वस्तू आरोग्यासाठी बहुधा चांगल्या नसतात. आज बनविलेली पोळी, भाकरी, भाजी उद्या बुरशी येवून खराब होते; म्हणून पोळी, भाकरी, भाजी खाणे आरोग्यासाठी चांगले. याउलट बिस्किटसारख्या पॅकिंगच्या वस्तू या महिनोन महिने टिकतात म्हणून त्या आरोग्यासाठी चांगल्या नाहीत. काय खावे व काय खावू नये याची याहून सोपी कसोटी आणखी काय असू शकणार ! बिनातेलाची फोडणी : आपल्याकडे सर्व प्रकारच्या भाज्या बनवितांना फोडणी देणे हा प्रकार असतोच. कढईतील तेल तापले की त्यामध्ये आधी मोहरी व जीरे टाकायचे. ते तडतडते व फुटायला लागते. मग त्यात हिंग, हळद व इतर मसाल्याचे पदार्थ टाकायचेत. काही वेळा लसण, अद्रक व कांदा बारीक करुन टाकल्या जातो. हे सर्व मिश्रण तेलामध्ये भाजून झाले की त्यात भाजी वा जे काही बनवायचे तो पदार्थ टाकायचा; रस्सेदार भाजी बनवायची असेल तर पाणी घालायचे, सुकी भाजी बनवायची असेल तर तशीच कोरडी शिजवायची. अशा पध्दतीने भाज्या, आमटी वा अन्य पदार्थ बनविल्या जातात. काही वेळा फोडणी तयार झाली की ती कोशिंबिर, काही भाज्या, वरण यासारख्या पदार्थावर वरुन टाकायची अशी पण पध्दत आहे. तेलातूपाचा एक थेंबही वापरायचा नाही, म्हणजे फोडणी द्यायचीच नाही का असा प्रश्‍न बहुतेकांच्या मनात येतो. खरेतर पथ्य फक्त तेलातूपाचे आहे व तेवढेच फक्त वापरायचे नाही आहे. त्यामुळे तेलातूपाचे पथ्य सांगितले की बहुतेकांना ते अशक्यच वाटते. कारण तेलतूप खायचे नाही म्हणजे मग फक्त उकडलेलेच खायचे असा बहुतेकांचा समज होतो. असे उकडलेले बेचव अन्न आयुष्यभर कोण व कसे खाणार हा यक्षप्रश्‍न पडतो. तेलतूप न वापरता फोडणी देता येते व तेलाशिवाय एरव्ही फोडणीत वापरल्या जाणारे इतर सर्व पदार्थ वापरता येतात हे लगेच ध्यानात येत नाही. चव ही फक्त तेलातूपावर अवलंबून नसते तर ती फोडणीसाठी वापरल्या जाणार्‍या या सर्व पदार्थांमुळे असते हा फरक चटकन ध्यानात येत नाही. तेला तूपाचा एक थेंब ही न वापरता भाज्या बनविता येतात ही बाब बहुतेकांना आश्‍चर्यकारक वाटते. खरेतर त्यात काहीही कठीण नसते. कधी पाहिले-ऐकलेले नसते म्हणून तसा समज आहे. यासाठी नेहमी फोडणी देतो तशीच सर्व तयारी करायची. कढई गरम करायची. मोहरी व जीरे भाजून ठेवायचे. कढई गरम झाली की हे भाजलेले मोहरी-जिरे कढईत टाकायचे. ते तडतडत फुटते. नंतर इतर गोष्टी कढईत टाकायच्यात. जसे लसण व कांदा. मंद आचेवर परतत राहत ते भाजायचे. खाली लागू नये यासाठी फारतर थोडे पाण्याचे सिपकारे मारत रहायचे. नंतर इतर गोष्टी नेहमीच्याच पध्दतीने करायच्यात. रस्सेदार भाजी असेल तर पाणी टाकल्या जातेच व खाली लागण्याचा प्रश्‍न येतच नाही. सुकी भाजी बनवायची असेल तर, कांदा वापरलेला असल्यास त्याचा चिकटपणा व ओलसरपणा यामुळे खाली भाजी लागत नाही. अशाप्रकारे जवळपास सर्वच भाज्या बिना तेलाच्या बनविता येवू शकतात. चवीमध्ये ही काही सुध्दा फारसा फरक न पडता. दिसण्यामध्ये जरुर थोडा फरक जाणवू शकेल. चवीचा व तेलाचा संबंध आपल्या डोक्यात पक्का बसलेला असल्याने फक्त असे वाटेल. हा संबंध पूर्णपणे काढून टाकावा लागेल. ==============