हमारे बचपन में कपड़े तीन टाइप के
ही होते थे •••
स्कूल का ••• घर का ••• और किसी
खास मौके का •••
अब तो ••• कैज़ुअल, फॉर्मल, नॉर्मल,
स्लीप वियर, स्पोर्ट वियर, पार्टी वियर,
स्विमिंग, जोगिंग, संगीत ड्रेस,
फलाना - ढिमका •••
जिंदगी आसान बनाने चले थे ••• पर
वह कपड़ों की तरह कॉम्प्लिकेटेड हो
गयी है •••🤕🤕🤔🤔
बचपन में पैसा जरूर कम था
पर साला उस बचपन में दम था"
.
"पास में महंगे से मंहगा मोबाइल है
पर बचपन वाली गायब वो स्माईल है"
.
"न गैलेक्सी, न वाडीलाल, न नैचुरल था,
पर घर पर जमीं आइसक्रीम का मजा ही कुछ ओर था"
.
अपनी अपनी कारों में घुम रहें हैं हम
पर किराये की उस साईकिल का मजा ही कुछ और था
"बचपन में पैसा जरूर कम था
पर साला उस बचपन में दम था" 👌
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